‘ऑपरेशन मां’ के कारण 50 कश्मीरी युवाओं ने छोड़ा आतंक का रास्ता

0
jambo

श्रीनगर, कश्मीर स्थित भारतीय सेना की 15वीं कोर द्वारा की गई पहल ‘ऑपरेशन मां’ का असर दिखने लगा है। इस पहल के कारण इस साल 50 कश्मीरी युवक आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। 15वीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों के निर्देशन में शुरू किए गए इस अभियान में लापता युवकों को खोजने और उनके परिजन तक पहुंचाने के काम को अंजाम दिया गया।

बता दें कि सेना की 15वीं कोर को चिनार कोर भी कहा जाता है। कोर ने घाटी और नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेफिनेंट जनरल ढिल्लों ने हाल ही में कहा, ‘पवित्र कुरान में मां का महत्व समझाते हुए कहा गया है कि पहले अच्छे काम करो, फिर अपनी मां की सेवा करो, फिर अपने पिता के पास जाओ। इसी से मुझे भटके हुए नौजवानों को उनके परिवार तक पहुंचाने में मदद मिली।’

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा- हमने एनकाउंटर रोककर कराया सरेंडर
अभिभावकों की पहचान गुप्त रखते हुए उनके संदेश दिखाकर जनरल ढिल्लों ने उन्हें घाटी का मूल्यवान तोहफा कहा। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में सेना के मानवीय कार्यों के प्रति बहुत सम्मान है। जनरल ने बताया कि कुछ स्थानों पर मुठभेड़ ठीक बीच में रोककर भी आतंकवादियों का समर्पण कराया गया है।

उन्होंने कहा, ‘स्थानीय आतंकियों के सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में फंसने की सूचना मिलने पर हम उसकी मां का पता लगाते हैं और दोनों की बातचीत कराने का प्रबंध करते हैं। कुछ मुठभेड़ों का अंत मां बेटे के करिश्माई मिलन से हुआ है और इस प्रकार सेना के प्रयासों से हमने कश्मीरी युवाओं की जान बचाई है। हमें शव गिनने का शौक नहीं है बल्कि उन युवाओं की संख्या गिनना पसंद करते हैं, जिन्हें हमने उनके परिजनन से मिलवाया है। मैं प्रसन्न हूं कि इस साल 50 युवा अपने परिवार में वापस आ चुके हैं।’

Sumo

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More